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Saturday, 13 June 2015

बॉलिवूड के हीरो कैसे बने ज़ीरो से हीरो






फ़िल्मी  दुनिया  के  ऐसे  कई  सितारे  हे  जिन्होंने  अपना  सफर  गरीबी  से  आमिर तक  किया  हे   इनमे से  कुछ  खास  लोग  :)









 फिल्म   इंड्रस्ट्री  में  पेर  रख  थे  ही  " जॉन  राव जनुमला "  उन्होंने  अपना  नाम  "जॉनी  लिव्हर  " ऐसे  रख  दिया , क्यू  की  वो हिंदुस्तान  लिव्हर  में  एक  कामगार  था , एशिया  खंड  से  सबसे  बड़ी  ज़ोपड़पट्टी  धारावी  में  रहनेवाला  जॉनी  आज  आलीशान  महलो में    रेह  रहा  हे  ,, अपने  गरीबी  पर  रोते  बेठने  से  लोगो  को  हँसाने  का  काम  उन्होंने  लिया   उन्होंने  अपने  आवाज  पर नियंत्रण  प् लिया  ही उसके साथ 

 उन्होंने  इण्डिया  के  १०   भाषा पर  प्रभुत्व  प्राप्त  कर ली ,,, लोगो 

 को 


 हँसाने  की  उन्होंने  ठाम  ही ली  हे ,, और  इसी  तरह  लोगोका  प्यार 

 और उनकी मेहनत  से  आमिर  बनते  चले  गए ::









 १९६९  में  " सात  हिंदुस्तानी "  इस  फिल्म से   सुरवात  करनेवाले  अमिताब  बच्चन  "  इनके  सुरवात  के फिल्म  बॉक्स  ऑफिस  पर ही   जोरो से  गिर गयी ,   उसके' बाद  कम  से  कम  ४ साल  कड़ी  मेहनत  के  बाद  १९७३ में उनका  जंजीर  नाम की' फिल्म  आई  जिस  में उन्होंने' ऐंग्री  यंग म्यान  की किरदार  निभाया  था  और उस   फिल्म  से  उन्होंने  कामयाबी  का  पहेला  कदम  बढ़ाया  ,,उसके  बाद  कई  फिल्म  आये  और  बेहतरीन  काम  और लगाम  से उन्हें  कामयाबी  मिल  ती  गयी

कामयाबी  लोगो के' जीवन  में  चढ़ -उतार  , हार - जीत  होती ही रेहति  हे ,,इसका  कारण  ये ही  की वो   सब  हर  वक्त  कोशिश  करते  रेह्ते  हे ,, जिंदगी  में  हर  वक्त  नया  अनुभव  लेते  हे , जिंदगी  के  सफर  में एक  वक्त   ऐसा  भी आया  था  की  अमिताब  को  कोई  भी सफलता  नहीं मिल रही थी  ,, उन्हें  बड़ा  पर्दा  साथ  नहीं  दे  रहा  था ,,फिर भी उन्होंने  हार  नहीं  मानकर  टीवी  शो " कोण बनेगा  करोड़  पति  " इस   कार्यक्रम  से  लोगो  की दिल और प्यार  पाने  में सफल  रहे  और फिर से  वो  कामयाब  बनते  गए ,,

कर्म से  कर्म  करनेवाले  इस  आदमी  को आज  छोटे  और बड़े  दोनों  पर्दो पर  राज  किया हे  और चलता  आ रहा हे ,आज   फिल्म इंडिस्ट्री   में सबसे  ज्यादा  मान  लेनेवाले  कलाकार  अमिताब बच्चन  हे  ,,जो एशिया  खंड  से  पहले  कलाकार  हे जिनका  मेन  का  पुतला  अमिरेका  में  प्रदर्शन  में लगाया  गया  हे :







 मराठी  आदमी  को अभिमान  लगे ऐसे ये  सीधा -साधा  आदमी  याने  " नाना  पाटेकर "  जिनका  असली  नाम  विश्वनाथ  पाटेकर  हे।   उनका  १९५१  में मुंबई  में  जन्म  हुआ  हे।  सिर्फ  १३ साल  के  रहते  उन्हें  अपने  गरीबी  और कठिनाई  को ज़ुन्ज़  देकर  काम  करने  जाना  पड़ता  था ,, फिल्मो  के  बनेर  कलर  करने  का काम उस  वक्त  नाना  करते  थे   सिर्फ़े  ३५ रु  पगार  और एक  वक्त  का  खाना  ऐसी  कठिनाई  परिस्तिथि  होकर  भी वक्त  से  लड़कर  उन्होंने  मराठी  फिल्म  इंड्रस्ट्री  में  अपनी  बाजु  रख  दी  , अपनी  मेहनत  और  ईमादार  से  उन्होंने' हिंदी  इंड्रस्ट्री   अपना  सिक्का  उड़ाया  ,और इसी  तरह  उन्हें  राष्ट्रपुरस्कार  भी  मिला  , और आज  नाना  के पास  मान _ सन्मान  , प्रसिद्धि  - पैसा  -गाड़ी  -ये सब  हे ,पोस्टर  कलर  करने  वाले  नाना  के पोस्टर  फिल्म  डायरेक्टर  को निकलने  पड़े ,, इतना  सब  होकर  भी  नाना  ने  कभी  भी  अपना   साधापना ( simplety)   नहीं  छोड़ा


दोस्तों  आगर  हमने भी  कोशिश  की  तो  हम  भी इनमे  से  एक  हो सकते  हे  ,, और एक बाथ  याद  रखो  तुम  गरीब   घरोमे  पैदा  हुए  उसमे  तुम्हारी  कोई  गलती  नहीं  हे  " पर तुम  मरोगे  भी  गरीब  घर  में  उसमे  तुम्हारी  ही गलती हे  


Thank You 





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